भोजन की परंपरा और उनका महत्व। खाद्य सुदृढ़ीकरण की भूमिका। भारत में सही खाने की चुनौती का पहलू। मध्य प्रदेश का जनजातीय भोजन।

 भोजन की परंपरा और उनका महत्व

भोजन केवल जीवन को बनाए रखने का साधन ही नहीं है, बल्कि यह किसी भी समाज और संस्कृति का अभिन्न अंग होता है। भारत जैसे विविधता वाले देश में भोजन की परंपराएँ अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों, जलवायु, कृषि पद्धतियों और सांस्कृतिक परंपराओं पर निर्भर करती हैं।

भोजन की परंपरा के महत्वपूर्ण पहलू

सांस्कृतिक पहचान – हर क्षेत्र की अपनी अनूठी भोजन परंपरा होती है, जो वहां की संस्कृति को दर्शाती है।

उदाहरण: बंगाल में मछली-भात, पंजाब में सरसों का साग और मक्के की रोटी।

धार्मिक मान्यताएँ – भोजन का संबंध विभिन्न धर्मों से भी जुड़ा हुआ है। उदाहरण: हिंदू धर्म में सात्विक भोजन, मुस्लिम समुदाय में हलाल भोजन, जैन धर्म में बिना कंद-मूल का भोजन।

आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान – प्राचीन काल से ही भोजन को औषधीय गुणों के अनुसार ग्रहण किया जाता रहा है।उदाहरण: हल्दी वाला दूध (इम्यूनिटी बूस्टर), छाछ (पाचन सुधारक)।

त्योहारों और विशेष अवसरों का हिस्सा – भारत में भोजन विशेष अवसरों और त्योहारों का अभिन्न अंग होता है।उदाहरण: दीपावली पर मिठाइयाँ, होली पर गुजिया, ईद पर सेवईं।

मौसमी प्रभाव – विभिन्न ऋतुओं के अनुसार भोजन की परंपराएँ बदलती हैं। उदाहरण: सर्दियों में तिल-गुड़, गर्मियों में लस्सी और फलों का अधिक सेवन।


खाद्य सुदृढ़ीकरण की भूमिका

खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification) का अर्थ है खाद्य पदार्थों में सूक्ष्म पोषक तत्वों (विटामिन और खनिज) को जोड़कर उनके पोषण मूल्य को बढ़ाना। यह कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में सहायक होता है।

खाद्य सुदृढ़ीकरण के प्रकार

अनिवार्य खाद्य सुदृढ़ीकरण – सरकार द्वारा अनिवार्य रूप से किए जाने वाले सुधार। उदाहरण: आयोडीन युक्त नमक।

स्वैच्छिक खाद्य सुदृढ़ीकरण – खाद्य निर्माता स्वेच्छा से अपने उत्पादों को पोषक तत्वों से समृद्ध करते हैं।उदाहरण: विटामिन D युक्त दूध, आयरन युक्त आटा।

खाद्य सुदृढ़ीकरण के लाभ -

✅ कुपोषण से बचाव।

✅ पोषण स्तर में सुधार।

✅ स्वास्थ्य लागत में कमी।

✅ बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार।


भारत में प्रमुख खाद्य सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम -

  • आयोडीन युक्त नमक (National Iodine Deficiency Disorders Control Program - NIDDCP)
  • लौह और फोलिक एसिड अनुपूरण (Iron & Folic Acid Supplementation - IFA) Program
  • मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme) में फोर्टिफाइड भोजन
  • प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना

भारत में खाद्य सुरक्षा और सही पोषण प्राप्त करना एक जटिल चुनौती है।

(A) खाद्य सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियाँ-
  • कुपोषण (Malnutrition) – भारत में अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएँ कुपोषण का शिकार हैं।
  • भोजन की बर्बादी (Food Wastage) – उत्पादन और वितरण में भोजन की भारी मात्रा में बर्बादी होती है।
  • कृषि और जलवायु परिवर्तन – मौसम की अनिश्चितता से खाद्य उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
  • संतुलित आहार की कमी – गरीब और मध्यम वर्ग संतुलित आहार प्राप्त नहीं कर पाते।
  • शहरीकरण और जंक फूड का बढ़ता प्रभाव – पारंपरिक पोषक भोजन की जगह प्रोसेस्ड फूड का उपयोग बढ़ रहा है।
(B) समाधान और सरकार की पहल
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA, 2013) – गरीबों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराना।
आंगनवाड़ी कार्यक्रम – बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण समर्थन।
मिड-डे मील योजना – सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन प्रदान करना।

मध्य प्रदेश का जनजातीय भोजन
मध्य प्रदेश में कई जनजातियाँ निवास करती हैं, जिनकी अपनी अनूठी खाद्य परंपराएँ हैं। इन समुदायों का भोजन प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है, जो स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करता है।

प्रमुख जनजातीय समूह और उनका भोजन

गोंड जनजाति - प्रमुख भोजन: कोदो-कुटकी, जंगली फल, महुआ, मछली, सत्तू।

भील जनजाति - प्रमुख भोजन: मक्का की रोटी, बांस की कोपलें, जंगली शहद।

बैगा जनजाति - प्रमुख भोजन: कंद-मूल, महुआ, चावल, कोदो, बैगानी रोटी।

सहरिया जनजाति - प्रमुख भोजन: बाजरा, तिल, पेड़ की छाल से बनी चाय, मांसाहारी भोजन।

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