मध्यप्रदेश का मध्यकालीन इतिहास
मध्यप्रदेश का मध्यकालीन इतिहास
मध्यप्रदेश का मध्यकालीन इतिहास (8वीं से 18वीं शताब्दी) कई प्रमुख राजवंशों, युद्धों, सांस्कृतिक विरासत और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। इस काल को प्रारंभिक मध्यकाल (8वीं-13वीं शताब्दी) और उत्तर मध्यकाल (13वीं-18वीं शताब्दी) में विभाजित किया जा सकता है।
1. प्रारंभिक मध्यकाल (8वीं - 13वीं शताब्दी)
गुर्जर-प्रतिहार वंश (8वीं - 11वीं शताब्दी)
- प्रतिहारों ने पश्चिमी और मध्य भारत में शासन किया।
- मिहिरभोज (836-885 ई.) इस वंश के सबसे प्रतापी शासक थे।
- अरब आक्रमणों को रोकने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।
परमार वंश (9वीं - 14वीं शताब्दी)
- मालवा क्षेत्र में शासन करने वाला सबसे प्रमुख राजवंश था।
- राजा भोज (1010-1055 ई.) इस वंश के महान शासक थे, जिन्होंने शिक्षा, कला और स्थापत्य को बढ़ावा दिया।
- भोजशाला (धार) उनकी विद्या स्थली थी।
चंदेल वंश (9वीं - 13वीं शताब्दी)
- चंदेलों ने बुंदेलखंड में शासन किया और खजुराहो के मंदिरों का निर्माण कराया।
- इनकी राजधानी महोबा थी।
- विद्याधर चंदेल ने महमूद गजनवी से संघर्ष किया।
कलचुरी वंश (10वीं - 13वीं शताब्दी)
- इस वंश ने त्रिपुरी (जबलपुर) में शासन किया।
- गंगेयदेव और कर्णदेव इस वंश के प्रमुख शासक थे।
2. उत्तर मध्यकाल (13वीं - 18वीं शताब्दी)
दिल्ली सल्तनत का प्रभाव (13वीं - 16वीं शताब्दी)
- अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) ने मालवा और ग्वालियर पर आक्रमण किया।
- तुगलक, खिलजी और लोदी वंशों ने इस क्षेत्र पर शासन किया।
मालवा सल्तनत (1401-1562 ई.)
- दिलावर खान गौरी ने मालवा में स्वतंत्र सल्तनत बनाई।
- होशंगशाह (1405-1435 ई.) इस वंश के प्रसिद्ध शासक थे, जिन्होंने मांडू को अपनी राजधानी बनाया।
- बाज बहादुर और रानी रूपमती की प्रेम कहानी इसी काल से जुड़ी है।
गोंडवाना राज्य (14वीं - 18वीं शताब्दी)
- इस वंश की वीरांगना रानी दुर्गावती (1550-1564 ई.) ने अकबर की सेना से युद्ध किया और वीरगति प्राप्त की।
मुगल काल (16वीं - 18वीं शताब्दी)
- अकबर ने मालवा, बुंदेलखंड और गोंडवाना को अपने साम्राज्य में मिला लिया।
- बुंदेलखंड के वीर राजा छत्रसाल ने औरंगजेब के खिलाफ विद्रोह किया।
मराठा काल (18वीं शताब्दी)
- मराठाओं ने ग्वालियर, मालवा और बुंदेलखंड पर शासन किया।
- महादजी सिंधिया ग्वालियर के सबसे प्रसिद्ध मराठा शासक थे।
मध्यकालीन मध्यप्रदेश की प्रमुख विशेषताएँ
कला और स्थापत्य – खजुराहो मंदिर, भोजशाला, होशंगशाह का मकबरा, ग्वालियर किला।
धर्म और संस्कृति – हिन्दू, जैन और इस्लाम धर्म का प्रभाव बढ़ा।
शासन प्रणाली – विभिन्न राजवंशों ने प्रशासनिक सुधार किए।
युद्ध और संघर्ष – राजवंशों के बीच संघर्ष और मुगलों व मराठाओं का प्रभाव बढ़ा।
निष्कर्ष-
मध्यप्रदेश का मध्यकालीन इतिहास राजवंशों, युद्धों और सांस्कृतिक समृद्धि से भरा हुआ है। परमार, चंदेल, गोंड और मराठा शासकों ने अपनी छाप छोड़ी। दिल्ली सल्तनत, मालवा सल्तनत और मुगलों का भी इस क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ा।
Comments
Post a Comment